समीर परिमल

एक मुट्ठी आसमाँ बाक़ी रहा – समीर परिमल

एक मुट्ठी आसमाँ बाक़ी रहा, ग़ज़ल, समीर परिमल बहर 2122 2122 212 पर कही गई एक मुट्ठी आसमाँ बाक़ी रहा, ग़ज़ल, समीर परिमल साहिब की बेहतरीन गज़लों में से है। बेहतरीन रवानी, लाजवाब कहन और सधे हुए शिल्प का बेमिसाल उदाहरण है समीर परिमल साहिब की यह गज़ल। एक मुट्ठी आसमाँ बाक़ी रहा हौसलों का कारवाँ …

संजू शब्दिता

अब्र ने चाँद की हिफ़ाजत की – संजू शब्दिता

अब्र ने चाँद की हिफ़ाजत की संजू शब्दिता इलाहाबाद की एक प्रतिभाशाली शायरा हैं। उनकी प्रतिभा की झलक इस ग़ज़ल में नज़र आ जाती है। खूबसूरत मतले से शुरूअ होकर आखिरी शे’र तक संजू शब्दिता ने अपनी छाप छोड़ी है। यह ग़ज़ल उन्होंने बहर 2122 1212 22 पर कही है। अब्र ने चाँद की हिफ़ाजत …

Poetry | Harish Darvesh | Basti,| UP
हरीश दरवेश

महँगा लिबास कार पे माला गुलाब की – हरीश दरवेश

महँगा लिबास कार पे माला गुलाब की यह ग़ज़ल श्री हरीश दरवेश साहब की जदीद ग़ज़लों में से एक है। श्री हरीश दरवेश जी उत्तर प्रदेश के बस्ती नामक जगह से आते हैं। जनाब हरीश दरवेश साहब ने अदम गोंडवी और दुष्यंत कुमार जैसे गज़लकारों की परंपरा को आगे बढ़ाया है। यह उनकी ग़ज़ल में …

samra
समर कबीर

समरा : शायर – समर कबीर

समरा: वारिस-ए-क़मर का सरमाया मोहतरम जनाब समर कबीर साहब के वालिद मरहूम जनाब क़मर साहब एक आला दर्ज़े के शायर थे; यानि ग़ज़लगोई जनाब समर कबीर साहब के खून में है और उनकी ग़ज़ल का हर शे’र इस बात की तस्दीक़ भी करता है। समरा- एक सौ बारह पृष्ठ, तक़रीबन सौ ग़ज़लें; फ़क़त इतना ही …

निलेश 'नूर'

दिल के ज़ख्मों से उठी जब से गुलाबी ख़ुशबू – निलेश नूर

दिल के ज़ख्मों से उठी जब से गुलाबी ख़ुशबू “दिल के ज़ख्मों से उठी जब से गुलाबी ख़ुशबू” निलेश नूर भाई की यह ग़ज़ल सबसे पहले मैंने ओबीओ पर पढ़ी थी।  बेहद मुश्किल रदीफ को  उन्होंने बड़ी आसानी से निभाया है। बहर 2122 1122 1122 22 पर  लिखी इस ग़ज़ल का हर शे’र मानीख़ेज़ है। ग़ज़ल …

दरवेश भारती

मस्ती-भरी वो उम्र सुहानी किधर गयी – दरवेश भारती

मस्ती-भरी वो उम्र सुहानी किधर गयी मस्ती-भरी वो उम्र सुहानी किधर गयी, श्री दरवेश भारती जी यह ग़ज़ल उन सुहाने दिनों की याद दिलाती है जो हर व्यक्ति अपने साथ संजोकर रखना चाहता है। श्री दरवेश भारती जी ग़ज़ल की खासियत ही है कि वे बिना भारी-भरकम शब्दों का प्रयोग करे गहरी बात बड़े आराम …

दरवेश भारती

बुलंदी हो बुलंदी-सी तो ये मशहूर करती है- दरवेश भारती

बुलंदी हो बुलंदी-सी तो ये मशहूर करती है- दरवेश भारती श्री दरवेश भारती जी सिर्फ एक नाम नहीं बल्कि अपने आप में पूरा युग हैं, वे विगत कई दशकों से ग़ज़ल की दुनिया में सक्रिय हैं। उर्दू शब्दों के साथ आम बोलचाल के शब्दों को खूबसूरती से अपनी ग़ज़लों में समाहित कर आज के परिवेश …

दरवेश भारती

नारे विकासवाद के लाते रहे बहुत – दरवेश भारती

नारे विकासवाद के लाते रहे बहुत नारों को नारेबाज़ भुनाते रहे बहुत सचमुच के मोतियों से भरा घर मिला उन्हें जो मोतियों-सी बातें लुटाते रहे बहुत हँस-हँस के जो भी करते रहे मर्हलों को सर एज़ाज़ उम्र-भर वही पाते रहे बहुत ता’बीर पा सका न कोई, बात है अलग आँखों में ख़्वाब यूँ तो समाते …

समर कबीर

ज़ह्न में यूँ तो रौशनी है बहुत – समर कबीर

मोहतरम जनाब समर कबीर साहब उज्जैन के वरिष्ठ व उस्ताद ग़ज़लकार हैं जो कई वर्षों से ग़ज़ल की दुनिया में सक्रिय हैं। उनकी पकड़ पर ग़ज़ल के अरूज पर जितनी मजबूत है उतनी उर्दू ज़बान पर भी। वे इस दौर के उर्दू अदब में अच्छा खासा दख्ल रखते हैं। उन्हें अदब की खिदमात के लिए …

त्रिवेणी पाठक

एक बार और तेरे नाम पे वारा जाऊँ – त्रिवेणी पाठक

एक बार और तेरे नाम पे वारा जाऊँ सोचता हूँ कि तेरी सिम्त दुबारा जाऊँ तू मेरी रूह में शामिल हो हवा की मानिंद मै तेरे जिस्म की मिट्टी में उतारा जाऊँ उम्र भर हिज्र की घाटी में रहा बेआवाज़ लाख चाहा कि पुकारूँ या पुकारा जाऊँ इश्क ग़र खेल ही ठहरा तो चलो खेल …