Pukara hai Humne Giriraj Bhandari
गिरिराज भंडारी

पुकारा है हमने उसे बार-बार – गिरिराज भंडारी

पुकारा है हमने उसे बार-बार

पेश है गिरिराज भंडारी जी की एक ग़ज़ल

अँधेरों के मित्रों हवा दीजिये
जलाता हूँ दिया बुझा दीजिये

लिये आइना सबसे मिलता रहा
सभी अब मुझे बद्दुआ दीजिये

हमारा यकीं चाँद से उठ गया
हमें जुगनुओं का पता दीजिये

पुकारा है हमने उसे बार-बार
न कहना उसे फिर सदा दीजिये

मेरी बातें कब राज़ होने लगीं
जिसे आप चाहें बता दीजिये

मेरे आबला खुश हुये देखकर
कहूँ क्यों मैं पत्थर हटा दीजिये

भुलाकर ख़ुदी से मिला सबसे मैं
मुझे आज मुझसे मिला दीजिये

हमारा यकीं चाँद से उठ गया
हमें जुगनुओं का पता दीजिये

गिरिराज भंडारी

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1 Comment

  1. आलोक मित्तल says:

    बेहतरीन ग़ज़ल कही आपने वाहहह

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