Raah|Rahbar|ghazal|Suneeta Pandey|Ghazalgo
सुनीता पाण्डेय 'सुरभि'

राह में एक राहबर के सिवा – सुनीता पाण्डेय ‘सुरभि’

राह में एक राहबर के सिवा

सुनीता पाण्डेय ‘सुरभि’ इलाहाबाद की शायरा हैं। जो अपने लेखनी से अक्सर प्रभावित करती हैं। उनकी यह ग़ज़ल आपको ज़रूर पसंद आएगी।

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राह में एक राहबर के सिवा
कुछ नहीं चाहा हमसफ़र के सिवा

एक मरकज़ पे ये नहीं रुकती
ज़िन्दगी क्या है इक सफ़र के सिवा

ऐसे किरदार देखे हैं जिनमें
ऐब ही ऐब हैं हुनर के सिवा

शब की तारीकियाँ नहीं देखीं
हमने तो रौनक ए सहर के सिवा

एक परिंदे की मिल्कियत है यही
कुछ नहीं उस पे बालोपर के सिवा

एक मरकज़ पे ये नहीं रुकती
ज़िन्दगी क्या है इक सफ़र के सिवा

सुनीता पाण्डेय ‘सुरभि’

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