Samunder, Shayari, Hindi,
- अनुज 'अब्र'

ख़ामख़ा हैरान होंगे इक समंदर देखकर – ‘अनुज अब्र’

क्या करेंगे आप मेरे दिल के भीतर देखकर

अनुज ‘अब्र’ आज के दौर के उत्साही, मेहनती और सीखने को तत्पर शाइर हैं। जो अपनी ग़ज़ल के हर शे’र के पीछे कड़ी मेहनत करते हैं। उनकी इस गज़ल की गई उनकी मेहनत साफ दिखाई देती है।
“क्या करेंगे आप मेरे दिल के भीतर देखकर
ख़ामख़ा हैरान होंगे इक समंदर देखकर”
शानदार मतले से शुरू होकर ग़ज़ल बहती चली जाती है। यह ग़ज़ल बहर 2122 2122 2122 212 पर आधारित है।

Samunder, Shayari, Hindi,

क्या करेंगे आप मेरे दिल के भीतर देखकर
ख़ामख़ा हैरान होंगे इक समंदर देखकर

ये अमीरों की है बस्ती, है अलग इसका चलन
लोग मिलते हैं गले लोगों का पैकर देखकर

साथ चलने का किया था आपने जब फ़ैसला
रुक गए फिर क्यूँ भला राहों में पत्थर देखकर

जान पाया यूँ भी होती है इबादत या ख़ुदा
रक्स करते तितलियों को कुछ गुलों पर देखकर

आप बेशक ढेर सारे दोस्त रखिये ठीक है
पर भरोसा कीजिये थोड़ा सँभल कर देखकर

गर चराग़ों ने है की हर हाल में जलने की ज़िद
आँधियों ने पांव भी खींचे है तेवर देखकर

मुझसे कोई राबिता महसूस कर ये ‘अब्र’ भी
ख़ुद बरसते जा रहे हैं मुझको भी तर देखकर

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