Saman Kabeer

OBO Live Tarahi-100/Samar Kabeer

OBO Live Tarahi-100/Samar Kabeer OBO Live Tarahi-100 शीर्षक से पोस्ट होने वाली गज़लें ओबीओ डॉट कॉम से ली गई हैं। पिछले आठ वर्षों से अधिक समय से ओपन बुक्स ऑनलाइन द्वारा अनवरत आयोजित किया जाना वाला ओबीओ लाइव तरही मुशायरा हाल ही में अपने आयोजन के सौ अंक पूरे कर चुका है। इंटरनेट पर शायद …

वक़्त आने पे किधर से भी निकल जाऊँगा – रोहिताश्व मिश्र

वक़्त आने पे किधर, ग़ज़ल, रोहिताश्व मिश्रा बहर 2122 1122 1122 22 बहर पर कही गई वक़्त आने पे किधर, ग़ज़ल, रोहिताश्व मिश्रा जी की एक खूबसूरत ग़ज़ल है। रोहिताश्व मिश्रा एक प्रतिभाशाली ग़ज़ल गो हैं, जो साथी ग़ज़ल गो और ग़ज़ल प्रेमियों के बीच काफी लोकप्रिय हैं। खूबसूरत अशआर से सजी इस ग़ज़ल को …

बातों-बातों में किसी ख़्वाब का नक्शा बन जाए – त्रिवेणी पाठक

बातों-बातों में किसी ख़्वाब का नक्शा बन जाए दो क़दम साथ चलो क्या पता रस्ता बन जाए मुझ पे लानत जो तुम्हें सोच के पाऊँ न सुक़ून वस्ल भी क्या कि जो दुनिया में तमाशा बन जाए इश्क़ वो है कि मै भर आँख जिसे भी देखूँ हर वो सूरत मेरी ख़ातिर तेरा चेहरा बन …

आंखों की वीरानी पढ़ कर देखो ना- राज़िक अंसारी

इंदौर के रहने वाले वरिष्ठ शायर मोहतरम राज़िक अंसारी जी उर्दू गज़लों में अच्छा खासा दख्ल रखते हैं, वे वर्षों से विभिन्न मंचों पर सक्रिय हैं। उनकी गज़लों को रेख्ता डॉट ओआरजी जैसे प्रतिष्ठित साइट में जगह मिली है। वे बदलते दौर के साथ अपनी ग़ज़लों को लेकर चले हैं, जो यह साबित करने के …

जब तअल्लुक़ आपसे बिल वास्ता हो जायेगा- अय्यूब खान “बिस्मिल”

जयपुर के जनाब अय्यूब खान “बिस्मिल” न सिर्फ इंटरनेट बल्कि मंचों और अपने क्षेत्र के एक सक्रिय ग़ज़लकार हैं, जो अपनी सशक्त ग़ज़लों के ज़रिए अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज कराते आ रहे हैं। उर्दू ग़ज़लकारों के दरमियान अय्यूब खान “बिस्मिल” साहिब अपनी एक अलग ही पहचान रखते हैं। –शिज्जु शकूर जब तअल्लुक़ आपसे बिल वास्ता …

अगर ज़िन्दगी में न राहत मिले तो यकीं में न करना कमी, मांग लेना – रवि शुक्ला

बीकानेर, राजस्थान के रवि शुक्ल उत्तर पश्चिम रेलवे में कार्यरत हैं, ग़ज़लों पर उनकी जानकारी काबिले तारीफ़ है। श्री शुक्ल मसरूफ ज़िन्दगी में से कुछ पल निकाल कर अपने मनोभावों को अल्फ़ाज़ दिया करते हैं। पेश है उनकी एक ग़़ज़ल- – शिज्जु शकूर अगर ज़िन्दगी में न राहत मिले तो यकीं में न करना कमी, मांग …

मैं जैसे-तैसे किसी बद-नज़र से निकला था

मैं जैसे-तैसे किसी बद-नज़र से निकला था कोई बला थी मैं जिसके असर से निकला था तू संग ओ खार की बातें तो कर रहा है बता कि पाँव बरहना कब अपने घर से निकला था सुना है मैंने कि कल उसपे संगबारी हुई मगर वो पहले भी तो उस नगर से निकला था बुझा-बुझा सा …

बस किसी अवतार के आने का रस्ता देखना – निलेश ‘नूर’

इंदौर के श्री निलेश शेवगाँवकर ‘नूर’ जी के ग़ज़ल कहने का अंदाज़ ही सबसे जुदा है, उनका लहजा समकालीन ग़ज़लकारों के बीच उन्हें अलग पहचान देता है। निलेश नूर साहब की ये ग़ज़ल एक आईना है; आज की परिस्थितियों का अक्स इसमें दिखाई देता है –शिज्जु शकूर बस किसी अवतार के आने का रस्ता देखना …

गाँव को भी शहरी जीवन दे गया – के पी ‘अनमोल’

आप सभी के हुज़ूर पेश है रूड़की के सशक्त ग़ज़लकार मोहतरम के. पी. अनमोल साहब की एक बेहतरीन ग़ज़ल, गाँव को भी शहरी जीवन दे गया कौन इतना अजनबीपन दे गया एक गज टुकड़ा ज़मीं का देखिए भाई को भाई से अनबन दे गया याद मैंने क्या दिलाया उसको फ़र्ज़ हाथ में मुझको वो दरपन …

तुम्हारी याद में इक रात रुखसत और हो जाती

तुम्हारी याद में इक रात रुखसत और हो जाती तो फिर दुनिया के कहने को हिक़ायत और हो जाती मेरी जाँ को ऐ मालिक तूने बख़्शी नेमतें क्या-क्या बस उनके दिल में भी पैदा बसीरत और हो जाती नहीं रहता निशाँ तक मेरे घर का ऐसा लगता है अगर मुँह खोलने की इक हिमाक़त और …