Ghazal, Subhash Pathak, Zia

ये जो आँखों से अश्कबारी है – सुभाष पाठक ‘ज़िया’

ये जो आँखों से अश्कबारी है युवा शाइर सुभाष पाठक ‘ज़िया’ की ग़ज़लें मैं सोशल मीडिया में लगातार पढ़ता रहता हूँ। वह युवा और संयत शाइर हैं जो आभासी दुनिया के साथ-साथ वास्तविक अदब की दुनिया में लगातार सक्रिय हैं। सुभाष पाठक जी की ग़ज़लों को उनके पाठकों की मुहब्बत हासिल है। उनके फ़िक्रो फ़न …

Ghazal, Ghazal go, Saarthi, Love Poetry, Intezar

इन्तिज़ार इन्तिज़ार है तो है – सारथी

इन्तिज़ार इन्तिज़ार है तो है पटना के बैद्यनाथ सारथी ग़ज़लकारों की इस पीढ़ी के सशक्त और प्रतिभाशाली रचनाकार हैं। उन्हें अपनी रचनाओं को सहेजना और सँभालना आता है। किसी भी ग़ज़ल में बहर का आकार या अशआर की तादाद तासीर तय नहीं करती। बल्कि कहन की मजबूती भी ग़ज़ल का मेआर तय करती है। सारथी …

Ghazal, Aarti Kumari, Love Poetry

आप तो रिश्तों में भी चालाकियाँ करते रहे – डॉ. आरती

आप तो रिश्तों में भी चालाकियाँ करते रहे मुज़फ़्फ़पुर(बिहार) निवासी डॉ. श्रीमती आरती कुमारी एक आला दर्ज़े की शायरा हैं। उनकी ग़ज़लों में शिल्प की कसावट तो है ही कहन भी सार्थक है। ग़ज़ल सिर्फ शब्दों को बहर में सजाने का नाम नहीं है। ग़ज़ल तब मुकम्मल(पूर्ण) होती है जब दो मिसरों के बीच जो …

Ashok Anjum, Ghazal, Bahre Mir

खाना-पीना, हंसी-ठिठोली, सारा कारोबार अलग – अशोक अंजुम

खाना-पीना, हंसी-ठिठोली, सारा कारोबार अलग अशोक अंजुम जी की ग़ज़लों का अपना अलग ही लुत्फ़ है। भाषा और कहन के हवाले से उनकी हर ग़ज़ल में एक नयापन झलकता है। पहले इक छत के ही नीचे कितने उत्सव होते थे, सारी खुशियाँ पता न था यूँ कर देगा बाज़ार अलग, इस शे’र को ही देखिए, …

Giriraj Bhandari, Ghazal, Zindagi

है तर्कों की कहाँ हद जानता हूँ – गिरिराज भंडारी

है तर्कों की कहाँ हद जानता हूँ गिरिराज भंडारी जी की ग़ज़ल हमेशा सच्चाई के करीब होती है। तर्कों कहाँ हद जानता हूँ में उनका अनुभव और लोगों को देखने का नज़रिया दिखाई देता है। करें आकाश को छूने के जो दावे, मैं उनका मक़सद जानता हूँ इस शेर में उनके अनुभव की झलक दिखाई …

Ghazal, Siyasat, Ravi Shukla

हमें न ख़्वाब दिखाओ चुनाव के दिन हैं – रवि शुक्ल

हमें न ख़्वाब दिखाओ चुनाव के दिन हैं रवि शुक्ल जी बेहद संजीदा ग़ज़लकार हैं। उनकी संजीदगी देखिए इस तंज़िया गज़ल में भी खूब नज़र आई है। चुनाव और राजनीति में कई ग़ज़लें कही गई हैं लेकिन रवि साहिब का लहज़ा बिल्कुल जुदा है। इस शे’र को देखिए जो चल रहे हैं ज़माने में ले …

Barish, Shayari, Ghazal

जब भी बरसी अज़ाब की बारिश – अमित ‘अहद’

जब भी बरसी अज़ाब की बारिश बारिश रदीफ़ लेकर अमित अहद जी ने एक बहुत ही खूबसूरत ग़ज़ल कही है। वैसे तो देखने में यह ज़मीन बहुत मुश्किल जान पड़ती है। लेकिन अमित अहद साहिब ने जितनी आसानी से शायरी की है वो हैरान करती है। मक्ता देखिए “प्यार से रोक दी ही है, मैंने …

वफाएँ लड़खड़ाती हैं भरोसा टूट जाता है – अशोक अंजुम

वफाएँ लड़खड़ाती हैं भरोसा टूट जाता है श्री अशोक अंजुम जी की ग़ज़लें ही उनका परिचय है। ग़ज़लों की दुनिया में वर्षों से सक्रिय श्री अशोक अंजुम साहब बिल्कुल जदीद शायरी करते हैं। चाहे वो बिम्ब और प्रतीक हों या शब्द चयन इनकी गज़लें सीधे आम आदमी से जुड़ जाती हैं। श्री अशोक अंजुम साहब …

यूँ सब से एक रिश्ता है सभी का – रवि शुक्ल

यूँ सब से एक रिश्ता है सभी का बीकानेर, राजस्थान के श्री रवि शुक्ल जी ने कई बेहतरीन ग़ज़लें लिखी है। यह ग़ज़ल भी उन्हीं में से एक है। हाल ही में दीवान दौर ए हाज़िर प्रकाशित हुआ है। इसमें रवि शुक्ल जी की ग़ज़लें भी सम्मिलित की गई हैं। इस ग़ज़ल की बात करूँ …

बुझे चराग़ को फ़िर-फिर जला रहा हूँ मैं – अमित वागर्थ

बुझे चराग़ को फ़िर-फिर जला रहा हूँ मैं इलाहाबाद के शाइर अमित वागर्थ इलाहाबाद विश्वविद्यालय में सीनियर रिसर्च फेलो रहे हैं। अभी हाल ही में आपका चयन हरियाणा लोक सेवा आयोग से असिस्टेंट प्रोफ़ेसर (हिंदी) के पद पर हुआ है। अमित वागर्थ जी एक प्रतिभाशाली शाइर हैं। उनकी यह ग़ज़ल बहर 1212 1122 1212 22 …