जौन एलिया: एक अजब गजब शाइर – मुन्तज़िर फ़िरोज़ाबादी

जौन एलिया: एक अजब गजब शाइर जौन एक मुँहफट, बेबाक और बागी शायर थे। आप जौन को जितना पढ़ेंगे उतना जौन खुलते आएँगे। कुछ दिन में आप इस जौन वाइरस से एडिक्टड हो जाएँगे और एक तिश्नग़ी आपका शिकार करने लगेगी। नए शायरों की ग़ज़लें भी अब मीर, मोमिन, ग़ालिब, फ़ैज़, ख़ुमार के आगोश से …

Ghazal-go, Muntazir Firozabaadi, Kalaam

वक़्ते-क़याम और भी कुछ तो हो सकता था – मुन्तज़िर फ़िरोज़ाबादी

वक़्ते-क़याम और भी कुछ तो हो सकता था मुन्तज़िर साहब उन ग़ज़ल-गो की राह पर हैं, जिनकी ग़ज़लें परम्परा और आधुनिकता के बीच पुल की तरह हैं। शायरी में पारम्परिक लहजे की लचक बरकरार रखते हुए नए समय की बातें करना आसान नहीं होता। इसी मुश्किल काम को अंजाम दे रहे हैं ये। एक मेआरी …