Top 10 Hindi Sher, Ehtaram Islam,
- एहतराम इस्लाम

टॉप 10 शेर – एहतराम इस्लाम

टॉप 10 शेर – एहतराम इस्लाम

इलाहाबाद में जश्न ए ग़ज़ल कार्यक्रम के दौरान मुझे एहतराम इस्लाम साहिब से पहली बार मिलने का सौभाग्य प्राप्त हुआ। उसी दौरान उनकी ग़ज़लें भी साक्षात सुनने को मिली। जब मैंने पहली दफा एहतराम इस्लाम साहिब की ग़ज़लें पढ़ीं, पहले तो मुझे विश्वास नहीं हुआ कि उदाहरण, जागरण, व्याकरण जैसे शब्दों का इस्तेमाल ग़ज़ल में भी सहजता से हो सकता है।
बहुत कोशिशों के बाद वीनस जी के द्वारा मुझे हिन्दुस्तानी अकादमी, इलाहाबाद(उप्र) जैसी प्रतिष्ठित संस्था द्वारा प्रकाशित उनकी किताब है तो है” का 1993 में प्रकाशित अंक हासिल हुआ। यह उनकी नायाब, लीक से हटकर और हर दौर में वर्तमान के साथ चलती हुई ग़ज़लों का संग्रह है। वे अपनी ग़ज़लों के द्वारा एक आम भारतीय की ज़बान  बोलते हैं। उनकी किताब में संकलित ग़ज़लों में से चुने हुए अशआर आपके सामने प्रस्तुत करते मुझे बहुत खुशी हो रही है।

-शिज्जु शकूर

Top 10 Hindi Sher, Ehtaram Islam

 

 

 

 

 

युक्ति करो अपना मन ठण्डा करने की
शोलों के बाज़ार सजा दो काग़ज़ पर
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छिड़ गया है स्वच्छता अभियान शायद शहर भर में
गंदगी के ढेर सड़कों पर सजाए जा रहे हैं
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मेरा चेहरा बिगाड़ कर ही सही
मुझको पहचान तो रहे हैं लोग
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थे ज़ुबां वाले हमारे युग में, कैसे मानिए
मौन के अतिरिक्त क्या कोई प्रवक्ताओं में था
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तुमने जिन आँखों में कुछ लिक्खा हुआ पाया नहीं
हमने उनमें ढेर सारी पांडुलिपियाँ ढूँढ लीं
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तेरी नज़र में अगर दोस्तों की कीमत है,
पता न कर कि तुझे कौन छल गया कितना
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हुक्म है ख़ाना तलाशी का तो लुट ही जाइए
बोलिए कुछ मत लुटेरे से, कि सरकारी है वह
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दस्तकें जेहनों के दरवाज़े पे दे पाए न जो
आप ही कहिए भला कैसी गज़लकारी है वह
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मुस्कुरा कर ही मिलूँगा मुस्कुराती शक्ल से
लाख धुँधलाया हूँ लेकिन आइना हूँ आइना
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कारवाँ कैसे बढ़ता किसी ओर को
जो भी आया वही इक दिशा दे गया
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