रवि शुक्ल

यूँ सब से एक रिश्ता है सभी का – रवि शुक्ल

यूँ सब से एक रिश्ता है सभी का

बीकानेर, राजस्थान के श्री रवि शुक्ल जी ने कई बेहतरीन ग़ज़लें लिखी है। यह ग़ज़ल भी उन्हीं में से एक है। हाल ही में दीवान दौर ए हाज़िर प्रकाशित हुआ है। इसमें रवि शुक्ल जी की ग़ज़लें भी सम्मिलित की गई हैं। इस ग़ज़ल की बात करूँ तो पिन वाले शे’र में उन्होंने तस्वीर का दूसरा ही पहलू सामने रखा है। यानि पिन कहा जाए तो चुभन का जिक्र होता है मगर इस शे’र के मुताबिक पिन चुभता जरूर है लेकिन कागज़ों को भी जोड़े रखता है। इस गज़ल की बहर है 1222 1222 122

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यूँ सब से एक रिश्ता है सभी का
न मानो तो नहीं कोई किसी का

अँधेरा रोशनी की दे गवाही
यही तो फ़लसफ़ा है ज़िंदगी का

जो इक पिन कागज़ों को साथ रक्खे
नज़र आता है चुभना क्यूँ उसी का

बनावट छोड़कर, जो हो, बनो तुम
कभी तो हुस्न देखो सादगी का

हवा पानी ज़मीं बादल बचालो
यही पैग़ाम है गुज़री सदी का

बज़ाहिर देखती है मेरी आँखें
मगर है खेल सारा रोशनी का

रवि शुक्ल, बीकानेर

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1 Comment

  1. rajiv saxena says:

    bahut khoob

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